• October to December 2024 Article ID: NSS8847 Impact Factor:8.05 Cite Score:195968 Download: 625 DOI: https://doi.org/ View PDf

    रूपकों का बादशाह तुलसीदास

      शिवऔतार
        प्राध्यापक (हिन्दी) भगवान आदिनाथ कॉलेज ऑफ एजुकेशन, महर्रा ललितपुर (उ.प्र.)

शोध सारांश-  रूपकों का बादशाह तुलसीदास इस शोध पत्र का वर्ण्य विषय है। इसकी शोध परक विवेचना करने के पूर्व इसके सार रूप पर संक्षिप्त प्रकाश डालना उचित प्रतीत होता है। रूपकों का बादशाह तुलसी की यथार्थ परक झांकी देखी जा सकती है। इस शोध लेख में रूपकों का बादशाह तुलसी की शोधात्मक विवेचना की गई है। तुलसीदास ने अपने समय तक और अपने समकालीन प्रायः सभी प्रमुख काव्य-रूपों का न सिर्फ उपयोग किया, बल्कि सब में अपनी तरह का प्रयोग कर उनमें एक नई ऊर्जा का संचार भी किया है। इन सभी काव्य-रूपों को वे लोकप्रियता के वास्तविक निर्धारक तथा साहित्य के लक्ष्य, जनता तक ले जाने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार उक्त शोधपत्र की शोधात्मक विवेचना से यह स्पष्ट हो जाता है कि रूपकों का बादशाह तुलसी की चेतनाएँ विद्यमान हैं ।