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January to March 2025 Article ID: NSS8957 Impact Factor:8.05 Cite Score:81647 Download: 403 DOI: https://doi.org/ View PDf
उषा प्रियवंदा के उपन्यासों में नारी जीवन के विविध आयाम
डॉ. अर्चना बापना
सहा. प्राध्यापक, एडवास महाविद्यालय, उज्जैन (म.प्र.)
प्रस्तावना- नारी, समाज का एक अभिन्न अंग है। ’’नारी के बिना सृष्टि
की कल्पना नहीं की जा सकती’’ है। यही कारण है कि अपने जन्मकाल से ही हिन्दी उपन्यास
नारी जीवन और उसकी विभिन्न समस्याओं के प्रति सजग रहा है। प्रेमचन्द पूर्व के उपन्यासों
में प्राचीन आदर्शो के प्रति गहरी निष्ठा होने के कारण उपन्यासकारों ने उन्ही आदर्शो
के सहारे नारी का चित्रण किया और उन आदर्शो के परिप्रेक्ष्य में ही नारी, जीवन की सार्थकता
को दिखाने का प्रयास किया।
