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January to March 2025 Article ID: NSS9027 Impact Factor:8.05 Cite Score:22835 Download: 212 DOI: https://doi.org/ View PDf
आचार्य विशुद्धसागर के साहित्य में अध्यात्म और दर्शन एक समीक्षात्मक दृष्टिकोंण
डॉ. रचना तैलंग
प्राध्यापक (हिन्दी) शास. हमीदिया कला एवं वाणिज्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भोपाल (म.प्र.)दिलीप कुमार जैन
शोधार्थी (हिन्दी) शास. हमीदिया कला एवं वाणिज्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भोपाल (म.प्र.)
प्रस्तावना- “अध्यात्म और चितंन मानव
जीवन के महनीय तत्व हैं जो जीवन को सार्थकता प्रदान करते हैं। अध्यात्म के द्वारा हम
अपनी आत्मा के स्वरूप को पहचानने का उपक्रम करते हैं। चिंतन हमें वस्तु के मूल स्वरूप
को जानने की प्रेरणा प्रदान करता है। जब हमारा चिंतन सकारात्मक होता है तो व्यक्ति
को वस्तु का मूल स्वरूप समझ में आता हैं इस मूल स्वरूप को जानने के पश्चात् व्यक्ति
अध्यात्म की जिस दिशा में अग्रसर होता है वही उसके आत्मकल्याण का प्रबल आधार बनता है।
भव-भव से बंधन मुक्त होने का एक ही उपाय है कि व्यक्ति आत्मा के स्वरूप को पहचाने और
मोक्षमार्ग पर अग्रसर होकर मुक्ति को प्राप्त करे।‘’
