• April to June 2025 Article ID: NSS9132 Impact Factor:8.05 Cite Score:56203 Download: 334 DOI: https://doi.org/ View PDf

    प्राचीन भारतीय राज्यव्यवस्था में मंत्रिपरिषद की उपयोगिता वर्तमान संदर्भ में

      डॉ. जे. के. संत
        सहायक प्राध्यापक (राजनीति विज्ञान) प्रधानमंत्री काँलेज आफ एक्सीलेंस, शासकीय तुलसी महाविद्यालय, अनूपपुर (म.प्र.)

प्रस्तावना - सर्वमान विदित है कि समाजहित राष्टहित में अकेला मनुष्य सुगम कार्य करने में कभी भी समर्थ नही हो सकता, फिर अकेला राजा कैसे राज्य सम्बन्धी समस्त कार्य को बिना सहयोग के चला सकता है, अत्यन्त दुष्कर कार्य है, राज्य संबन्धी कार्य को सुव्यवस्थित संचालन हेतु मंत्रिपरिषद का होना नितांत आवश्यक है।1 यह भी सत्य है कि कोई व्यक्ति कितना भी बुद्धिमान हो हर क्षेत्र में परांगत नही हो सकता। इसलिये राज्य संबंधी समस्त विषयों एक ही व्यक्ति से सलाह मंत्रणा लेने से राजा हमेशा वास्तविकता पर पहुच सके ऐसा संभव ही नही है। इसलिये राजा को राज्य से संबंधित हर क्षेत्र में शासन संबंधी प्रत्येक समस्याओं के लिये मंत्रणा लेने के लिये विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों की आवश्यकता पडती है।2