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April to June 2025 Article ID: NSS9150 Impact Factor:8.05 Cite Score:21481 Download: 206 DOI: https://doi.org/ View PDf
समकालीन समाज में विवाह विच्छेद के कारणों का एक समाजशास्त्रीय अध्ययन
ऋतु गुर्जर
शोध छात्रा (समाजशास्त्र) माणिक्यलाल वर्मा श्रमजीवी महाविद्यालय, जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय, उदयपुर (राज.)डॉ. लवली भाटी
सहायक आचार्य (समाजशास्त्र) माणिक्यलाल वर्मा श्रमजीवी महाविद्यालय, जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय, उदयपुर (राज.)
शोध सारांश- प्रस्तुत शोध पत्र उदयपुर जिले
के तलाकशुदा पुरूषों एवं महिलाओं के विवाह विच्छेद के कारणों के अध्ययन पर आधारित है।भारतीय
समाज में विवाह को एक महत्वपुर्ण संस्कार माना गया है। परिवार के संचालन में पति पत्नी
की अह्म भूमिका रहती है। दोनों को समान रूप से अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहण करना
होता है। कभी-कभी किसी ना किसी दाम्पत्य जीवन में कई ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती
है। जिससे विवाह विच्छेद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। शोधार्थी द्वारा विवाह विच्छेद
के प्रमुख कारणों का अध्ययन किया जिसमें वैवाहिक संवाद और विश्वास की कमी, घरेलू हिंसा,
नशा और असम्मानजनक व्यवहार, आर्थिक दबाव और पारिवारिक हस्तक्षेप, असंगतता और व्यक्तिगत
प्राथमिकताओं में अंतर, सामाजिक दबाव, तकनीकी हस्तक्षेप और परामर्श की विसंगतियां पाई
गयी। वैवाहिक संबंधों में कई परिस्थितियों में विचारों और भावनाओं की खुलकर अभिव्यक्ति
नहीं होती। जीवनसाथी पर विश्वास की कमी वैवाहिक असंतोष को जन्म देती है। संवाद की कमी
के कारण गलतफहमियाँ उत्पन्न होती हैं। विश्वास और आपसी समझ का अभाव वैवाहिक जीवन को
प्रभावित करता है। आत्म-सम्मान को ठेस पहुँचाने वाले व्यवहार वैवाहिक जीवन में दूरी
का कारण बनते हैं। आर्थिक जिम्मेदारियां एवं फिजुलखर्ची को लेकर वैवाहिक मतभेद उत्पन्न
होते हैं। शैक्षिक स्तर की भिन्नता एवं वर्तमान परिप्रेक्ष्य में महिलाओं की स्वच्छंद
जीवनशैली भी कंही ना कंही विवाह विच्छेद के दरवाजे पर दस्तक देती है।
