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April to June 2025 Article ID: NSS9185 Impact Factor:8.05 Cite Score:9763 Download: 138 DOI: https://doi.org/ View PDf
शासकीय गोदामों में भण्डारण और खराबे का आर्थिक विश्लेषण (उज्जैन संभाग के संदर्भ में एक अध्ययन)
डॉ. मनु गौतम
एसोसिएट प्रोफेसर (अर्थशास्त्र) म. प्र. सामजिक शोध संस्थान, भरतपुरी, उज्जैन (म.प्र.)लवकुश पाटीदार
अतिथि विद्वान, भगतसिंह शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जावरा, जिला रतलाम (म.प्र.)
प्रस्तावना- प्रस्तुत शोध पत्र गेहूँ और चावल के शासकीय गोदामों
के भण्डारण के विशेष संदर्भ में किया गया है। मद्यप्रदेश और भारत के लिए महत्व रखता
है गेहूँ उत्पादन में मध्यप्रदेश का पहला स्थान है। प्रदेश के 35.49 लाख हेक्टेयर भूमि
पर गेहूँ की खेती की जाती है। मध्य प्रदेश में गेहूँ अक्टूबर-नवम्बर में बोया जाता
है तथा मार्च-अप्रैल में तैयार हो जाने पर फसल काट ली जाती है। गेहूँ की खेती मध्य
प्रदेश के पश्चिमी भाग में होती है। प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में ताप्ती और नर्मदा,
तवा, गंजाल, हिरण आदि नदियों की घाटियों और मालवा के पठार की काली मिट्टी के क्षेत्रों
में सिंचाई के द्वारा गेहूँ पैदा किया जाता है। प्रदेश के होशंगाबाद, सीहोर, विदिशा,
जबलपुर, गुना, सागर, ग्वालियर, निमाड़, उज्जैन, इंदौर, रतलाम, देवास, मंदसौर, झाबुआ,
रीवा और सतना जिलों में गेहूँ का उत्पादन मुख्य रूप से होता है। इसी प्रकार मध्य प्रदेश
के 41 जिलों में चावल की खेती होती है। जिनमें से 2 जिले मध्यम उत्पादकता समूह के अंतर्गत
हैं।
