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April to June 2025 Article ID: NSS9208 Impact Factor:8.05 Cite Score:5204 Download: 100 DOI: https://doi.org/ View PDf
सीवरेज कर्मकारों की स्वास्थ्य सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ
रिंकू साहू
शोधार्थी (विधि) मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर (राज.)डॉ. भाविक पानेरी
असिस्टेन्ट प्रोफेसर (विधि) मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर (राज.)
शोध सारांश- स्वच्छता मूल ही स्वास्थ्य है। देश को स्वच्छ और साफ-सुथरा रखने में सफाई कर्मकारों का योगदान महत्वपूर्ण व प्रशंसनीय है। सफाई कर्मकार सेवा भावना से, ‘स्वच्छता ही सेवा है’ मूल मंत्र को सरोकारा करते हुए, स्वच्छता मूल्य श्रृंखला के विभिन्न कार्यों में शामिल होते है। में स्वच्छता कार्य के प्रचलित रूपों में से सबसे चुनौतीपूर्ण रूप है मैन्यूअल स्कैवेंजिंग, जिसमें सफाई कर्मकार हाथों से, बिना किसी सहायता प्रणाली या सुरक्षा उपकरण के मानव मल के निपटान हेतु मल के सीधे संपर्क में आते है।
मैन्यूअल स्कैवेंजिंग में ठोस और तरल अपशिष्ट के आधार पर मानव मल का निपटान किया जाता है। तरल अपशिष्ट में जलशील शौचालयों से निकला मानव मल सीवरों और सेप्टिक टैंकों में जाता है। जिसकी सफाई हेतु मुख्यतः पुरुष कर्मकारों को नियुक्त किया जाता है। सीवर, सेप्टिक टैंकों, नालों की सफाई शारीरिक रूप से कठिन कार्य होने के कारण पुरुष सफाई कर्मकारों द्वारा ही कि जाती है।
जब हाथ से मैला ढोने वाला सेप्टिक टैंक की सफाई करता है, सीवर ट्रीटमेन्ट का रख-रखाव करता है। तब उसे सीवरेज कर्मकार कहा जाता है। आज देश 21वीं सदी में है और हमारे देश में इंसान के मलमूत्र को आज भी अन्य व्यक्तियों द्वारा हाथों से उठाया जाता है।
ये कर्मकार अंदर उतरकर अपने हाथों से बंद पडे सीवर और सेप्टिक टैंक खोलते है जिसमें गाद के साथ मल भी होता है। ऐसे सीवरों व सेप्टिक टैंकों की सफाई में सीवरेज कर्मकार अपनी जान गवाते है, क्योंकि ऐसे सेप्टिक टैंकों में कई हानिकारक गैसें बैक्टिरिया, जीवाणु, परजीवी और वायरस होते है जो सीवरेज कर्मकारों के स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होते है। नगरीकरण के कारण सीवर प्रणाली पर बढ़ता बौझ सही मशीनरी की कमी और सस्ते श्रम ने इस तरिके को जन्म दिया है। सीवरेज कर्मकार वर्षों से अपरिवर्तवीत परिस्थितियों में सफाई के लिए सीवर और सेप्टिक टैंकों में उतरते है और हानिकारक गैसों की वजह से मौत के शिकार हो जाते है। क्योंकि उनके पास उन सुरक्षात्मक उपकरणों व सुरक्षा प्रणाली का अभाव होता है; जो उन्हें इन जहरीली गैसों से बचा सके। अगर गैसों से बच भी जाए तो जिन खतरनाक परिस्थितियों में वे काम करते है उससे होने वाली स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों से वे बच नहीं पाते है। नगरीकरण के कारण पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं उत्पन्न हुई इन्हीं उत्पन्न समस्याओं में कुछ समस्याएं मानव मल के निपटान के संबंध में आई जिनका हल निकालने के लिए शौचालय और सीवेज सिस्टम जिसे मल निकास प्रणाली भी कहा जाता है की खोज की गई और इसमें अभी भी सुधार किया जा रहा है।
इस विकास के कारण सीवरेज कर्मकार हमारे घरों और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले कई रसायनों के संपर्क में भी आ रहे है जो इन शौचालयों की सफाई करने के दौरान सेप्टिक टैंकों और सीवरों में चले जाते है। सीवेज सिस्टम की बढती मांग और नए पर्यावरणीय नियमों के कारण अपशिष्ट जल के परिवहन और उपचार में तकनीकी जटिलता बढ गई है। भारत में लगभग 57758 सीवरेज कर्मकार है जो एक सदी से भी ज्यादा अपरिवर्तित परिस्थितियों और अस्वास्थ्य वातावरण में कार्य कर रहे है।
ये कर्मकार बिना किसी सुरक्षा उपकरण के काम करते हुए अक्सर मानव अपशिष्ट व अपशिष्ट जल के संपर्क में आते है। अपने कार्य की प्रकृति के कारण इन्हें सामाजिक अत्याचारों के साथ-साथ कई स्वास्थ्य संबंधी खतरों, रोगों का सामना भी करना पड़ता है। जिनमें मीथेन, हाइड्रोजन सल्फाइड, अमोनिया, कार्बनडाइआक्साइड जैसी हानिकारक गैसों के संपर्क में आना, श्वसन संबंधी विकार जीवविषाक्तता और कैसंरजन्यता, ऑस्टियो आर्थराइटिस और इंटरवर्टेबल डिस्क हर्नियेशन जैसे मस्कुलोस्केलेटल विकार, लेप्टोस्पायरोसिस जठरांत्रशोय, जिआर्डिया, लाम्बा, क्रिप्टोसोडियम, एस्कारियासिस और एंटामोइबा हिस्टोलिका जैसे परजीवी संक्रमण तवचा संबंधी विकार, बुखार, हैजा, शामिल है। सीवरेज कर्मकारों की इन स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को इंजीनियरिंग, चिकित्सकीय और विधायी उपायों द्वारा दूर किया जा सकता है जिसमें सीवर सिस्टम का उचित रख-रखाव, बेहतर वेंटिलेशन, खतरनाक गैसों से सुरक्षा, नियमित स्वास्थ्य जाँच, टीकाकरण, बीमारियों के शुरूआती लक्षणों का पता लगाकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना और कानूनों का प्रभावी प्रवर्तन शामिल है।
शब्द कुंजी-सीवरेज कर्मकार, सैप्टिक टैंक
सीवरेज, सीवरेज कर्मकारों के स्वास्थ्य संबंधी खतरे।
