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October to December 2024 Article ID: NSS9216 Impact Factor:8.05 Cite Score:45303 Download: 300 DOI: https://doi.org/ View PDf
भारतीय ज्ञान परंपरा में भूगोल का महत्व
डॉ. मोहन निमोले
सहा. प्राध्यापक (भूगोल) प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय माधव महाविद्यालय, उज्जैन (म.प्र.)
प्रस्तावना- भारतीय ज्ञान परंपरा और
भूगोल पर आधारित अध्ययन हमें यह समझने में मदद करता है कि कैसे प्राचीन भारत में प्राकृतिक
परिवेश, जलवायु, स्थलाकृतिक विविधता, नदियों, पर्वतों और समुद्रों को न केवल भौगोलिक
दृष्टि से देखा गया, बल्कि उन्हें धार्मिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक रूप से भी महत्व
दिया गया।भारतीय ज्ञान परंपरा, जिसमें ज्ञान, विज्ञान, संस्कृति, और दार्शनिक विचार
शामिल हैं। भूगोल का एक महत्वपूर्ण स्थान है। यह न केवल भारतीय जीवन के विभिन्न पहलुओं
को समझने में मदद करता है, बल्कि यह मानवता और प्रकृति के बीच संबंध को भी उजागर करता
है। नीचे कुछ प्रमुख बिंदुओं के माध्यम से हम भारतीय ज्ञान परंपरा में भूगोल के महत्व
को समझ सकते हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा में भूगोल का बहुत महत्व है, क्योंकि यह न केवल
भारत के भौतिक स्वरूप और जलवायु को समझने में मदद करता है, बल्कि मानव जीवन, संस्कृति
और इतिहास को भी प्रभावित करता है। भूगोल के अध्ययन से हमें यह समझने में मदद मिलती
है कि कैसे विभिन्न भौगोलिक स्थितियाँ लोगों के जीवन, उनके रीति-रिवाजों, व्यवसायों
और सामाजिक संरचनाओं को आकार देती हैं।
