-
April to June 2025 Article ID: NSS9220 Impact Factor:8.05 Cite Score:8042 Download: 125 DOI: https://doi.org/ View PDf
जयसमंद झील: परंपरा की रक्षा बनाम आधुनिकता की चुनौती : एक अध्ययन
मोनिका आमेटा
शोधार्थी (इतिहास) भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय, उदयपुर (राज.)डॉ. पंकज आमेटा
शोध निर्देशक (इतिहास) भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय, उदयपुर (राज.)
शोध सारांश - जयसमंद झील, जिसे एशिया की सबसे बड़ी कृत्रिम मीठे पानी की झील माना जाता है, न केवल मेवाड़ की जलवायु और कृषि व्यवस्था की धुरी रही है, बल्कि इसकी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का भी प्रतीक रही है। यह अध्ययन जयसमंद झील के पारंपरिक महत्व और वर्तमान में उस पर पड़ रही आधुनिक प्रभावों की चुनौतियों की समीक्षा करता है। विगत कुछ दशकों में पर्यटन, नगरीकरण, जल प्रबंधन तकनीकों और स्थानीय जनसंख्या की बदलती आवश्यकताओं ने झील की पारिस्थितिकी, सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना और आर्थिक उपयोग को प्रभावित किया है। परंपरागत जल संरक्षण प्रणालियाँ, धार्मिक अनुष्ठान, स्थानीय लोककथाएँ और जीवनशैली अब आधुनिक विकास के दबाव में कमजोर होती जा रही हैं। दूसरी ओर, आधुनिकता ने रोजगार, कनेक्टिविटी और पर्यटन को बढ़ावा भी दिया है। यह अध्ययन विभिन्न स्रोतों, क्षेत्रीय सर्वेक्षण, जनसाक्षात्कार और तुलनात्मक विश्लेषण के माध्यम से यह समझने का प्रयास करता है कि किस प्रकार परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित कर झील की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखा जा सकता है। निष्कर्षतः, शोध यह प्रस्तावित करता है कि यदि स्थानीय समुदाय, प्रशासन और विशेषज्ञ मिलकर नीति-निर्माण करें, तो जयसमंद झील को एक 'सांस्कृतिक रूप से सतत विकास मॉडल' में परिवर्तित किया जा सकता है।
शब्द कुंजी- जयसमंद झील, परंपरा, आधुनिकता, सांस्कृतिक विरासत,
पर्यावरणीय प्रभाव, सतत विकास l
