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July to September 2025 Article ID: NSS9256 Impact Factor:8.05 Cite Score:11217 Download: 147 DOI: https://doi.org/ View PDf
भारत में डिजिटल इंडिया की अवधारणा एवं इसके प्रभाव
डॉ. पुष्पा नागर
वरिष्ठ व्याख्याता, एम. ओ. एम. महात्मा ज्योतिराव फूले शा. पॉलिटेक्निक महाविद्यालय, खंडवा (म.प्र.)श्रीमती रंजना शक्तावत
वरिष्ठ व्याख्याता, महात्मा ज्योतिराव फूले शा. पॉलिटेक्निक महाविद्यालय, खंडवा (म.प्र.)
प्रस्तावना- भारत एक ऐसा देश है जो ‘विकसित भारत विजन के माध्यम से
अर्थव्यवस्था में विकसित देश के रूप में उभर कर सामने आ रहा है। एक वैश्विक नेता की
कल्पना को साकार करने के लिए नवाचार एवं आधुनिक तकनीकंे कारगार सिद्ध हो सकती है। भारतीय
अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संबंध अनुसंधान परिषद (ICRIER) द्वारा जारी डिजिटल अर्थव्यवस्था
की स्थिति की रिपोर्ट, 2024 के अनुसार भारत तीसरे स्थान पर अपनी उपस्थिति दर्ज कर चुका
है। देश की यह मंशा है कि वह तकनीकी प्रगति में विश्व मंच पर सबसे आगे रहे है। इस हेतु
समावेशी विकास, नवाचार, सामाजिक कल्याण कार्यक्रम, कौशल विकास और शिक्षा को बढ़ावा देकर
ही नागरिकों को सशक्त बनाने का प्रयास किया जा सकता है। भारत की अर्थव्यवस्था को महाशक्ति
में परिवर्तित करने के लिए सरकार ने 2015 में एक ऐसी पहल की है जिसके द्वारा भारत को
ज्ञान अर्थव्यवस्था एवं सशक्त समाज बनाया जा सके और इस पहल का नाम डिजिटल इंडिया रखा
गया। इसका उद्देश्य देश के नागरिकों का जीवन बेहतर बनाने के लिए इलेक्ट्रानिक माध्यमों
से अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देकर सरकारी सेवाओं को डिजिटल रूप प्रदान
किया जा रहा है।
जब देश में 2015 में नोटबंदी की गयी तो उस समय इलेक्ट्रानिक
माध्यमों से भुगतान प्रक्रिया को प्रोत्साहित किया गया था जो डिजिटल इंडिया कार्यक्रम
का ही एक रूप माना जा सकता है, जिसमें जनता द्वारा किये गये अधिकांश भुगतान केशलेस
होने लगे। इसी के चलते 2019 के कोरोना काल के समय भी जब लोगो को बाहर आने-जाने पर रोक
लगी थी तब भी इलेक्ट्रानिक माध्यमों से ही जनता द्वारा अधिकांश भुगतान एवं कार्य किये
गये।
शब्द कुंजी- डिजिटल इंडिया, इलेक्ट्रानिक
सेवाऐं, अर्थव्यवस्था, समावेशी विकास, सशक्तिीकरण।
