• July to September 2025 Article ID: NSS9376 Impact Factor:8.05 Cite Score:39220 Download: 279 DOI: https://doi.org/ View PDf

    रंगमंच की पृष्ठभूमि और हिन्दी साहित्य में रंगमंच परम्परा

      डॉ. रोशनलाल अहिरवार
        सहायक प्राध्यापक (हिन्दी) शासकीय स्वशासी कन्या स्नातकोत्तर उत्कृष्टता महाविद्यालय, सागर (म.प्र.)

शोध सारांश - मानव  जीवन में रंगमंच परम्परा का सर्वोच्च स्थान है जीवन में नीरसता को  दूर करने के लिए मनोरंजन का होना आवश्यक है इसमे  प्राचीन काल से रंगमंच की परम्परा महत्वपूर्ण रही है लोक रंगमंच संस्कृत,पारसी, हिंदी में विकसित हुआ है इसका आरंभ वैदिक काल से  वर्तमान समय तक  विकसित परम्परा को धारण किए हुये है ।रंगमंच की परम्परा तथा हिंदी साहित्य में रंगमंच परम्परा  का विकास शोधपत्र का विषय है।

शब्द कुंजी- रंगमंच परम्परा , संस्कृत रंग परम्परा , पारसी रंग परंपरा, लोक रंग परम्परा, हिन्दी साहित्य में रंगमंच परम्परा , भारतेन्दु युग रंग-परम्परा, प्रसादयुगीन रंग-परम्परा, प्रसादोत्तर रंग परम्परा।