-
October to December 2025 Article ID: NSS9449 Impact Factor:8.05 Cite Score:3159 Download: 78 DOI: https://doi.org/ View PDf
विधि के अन्तर्गत पर्यावरण संरक्षण एवं इससे जुड़ी स्वदेशी ज्ञान परंपराऐं
गरीमा राठौर
सहायक प्राध्याापक, शासकीय विधि महाविद्यालय, अशोकनगर (म.प्र.)
शोध सारांश- पर्यावरण यानि हमारे चारों और मौजूद ऐसा वातावरण जिसमें मनुष्य, जीव, जन्तु और वनस्पति जो कि एक दूसरे पर आश्रित हैं। पर्यावरण की रक्षा अनंत काल से वेदों, पुराणों और उपनिषदों में की गई है भारतीय ज्ञान परम्पराओं के अन्तर्गत व्यक्ति को हमेशा पर्यावरण संरक्षण के लिए आधार माना गया है। प्राचीन काल में व्यक्ति की दिनचर्या में पर्यावरण संरक्षण को कार्य एवं पर्यावरण संरक्षण को एक विचार माना गया। जिससे व्यक्ति एक स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सके और स्वस्थ शरीर एवं स्वस्थ मन के लिए हमारे चारों और का वातावरण भी अच्छा होना चाहिए। इसलिए भारतीय ज्ञान परम्पराओं के द्वारा व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण से कई प्रकार से जोड़ा गया। समय के साथ जैसे-जैसे समय बीतता गया पर्यावरण संरक्षण में जब व्यक्ति के द्वारा स्वदेशी परम्पराऐं तोड़ी जाने लगी तो पर्यावरण विधि का जन्म पर्यावरण के लिए एक कारगार हथियार साबित हुआ। जिससे व्यक्ति को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जा सके। इसलिए पर्यावरण संरक्षण के लिए विधि की उपयोगिता और भारतीय ज्ञान परम्पराओं दोनो का महत्त्व सर्वोपरि है। हम अपने इस शोध में दानों का ही अध्ययन करेंगे।
शब्द कुंजी -पर्यावरण, विधि, कानून, नियम, संरक्षण, संस्कृति, वातावरण, व्यक्ति, परंपराऐं, प्राचीन।
