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July to September 2025 Article ID: NSS9459 Impact Factor:8.05 Cite Score:285 Download: 22 DOI: https://doi.org/ View PDf
संस्कृत भाषा का वैश्विक योगदान तकनीकी युग के परिप्रेक्ष्य में
डॉ. यज्ञ आमेटा
सहायक आचार्य (संस्कृत) जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), उदयपुर (राज.)
शोध सारांश- संस्कृत भाषा भारतीय सभ्यता की बौद्धिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक चेतना की मूलाधार रही है। इसे सामान्यतः धार्मिक अथवा दार्शनिक भाषा के रूप में सीमित कर देखा गया, जबकि वास्तविकता यह है कि संस्कृत में विज्ञान, गणित, तर्कशास्त्र, व्याकरण, आयुर्वेद, खगोल, स्थापत्य और सूचना-संरचना के अत्यंत परिष्कृत सूत्र उपलब्ध हैं।
इक्कीसवीं शताब्दी का वर्तमान युग तकनीकी, डिजिटल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का युग है, जहाँ भाषाओं का मूल्यांकन उनके "संरचनात्मक स्पष्टता, नियमबद्धता, अर्थ-शुद्धता और गणनात्मक उपयुक्तता" के आधार पर किया जा रहा है। इस दृष्टि से संस्कृत भाषा की व्याकरणिक संरचना, पाणिनीय सूत्रात्मक प्रणाली, तथा अर्थ-निश्चितता उसे आधुनिक कम्प्यूटेशनल भाषाविज्ञान और AI के लिए अत्यंत उपयोगी बनाती है।
प्रस्तुत शोध-पत्र में संस्कृत भाषा के
वैश्विक योगदान को तकनीकी युग के परिप्रेक्ष्य में विश्लेषित करते हुए यह
प्रतिपादित किया गया है कि संस्कृत न केवल अतीत की गौरवशाली भाषा है, बल्कि भविष्य
की नैतिक, मानवीय और बौद्धिक तकनीक की आधारशिला भी बन सकती है।
