• October to December 2025 Article ID: NSS9468 Impact Factor:8.05 Cite Score:2861 Download: 74 DOI: https://doi.org/ View PDf

    उच्च शिक्षा के वैश्वीकरण में वेदकाल की शिक्षा और गाँधीजी का शिक्षा-दर्शन

      डॉ. किरण पवार
        सहा प्राध्यापक, श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ टीचर्स एजुकेशन, इन्दौर (म.प्र.)

शोध अध्ययन की भूमिका - वैदिक शिक्षा और भारतीय परिपे्रक्ष्य में उच्च शिक्षा में गाँधी - विचार भारतीय व्यक्तित्व का निर्माण करता है । आज के तकनीकी क्रांति के समय में शिक्षा में तकनीकी संसाधनों का समावेश, तकनीकी उपकरणों का प्रयोग आधुनिक युग का मानव तैयार करने में सक्षम रहा लेकिन मानवीयता या मानवता का समय जैसे कहीं खो गया । मानव को मानव बनाना, जीवन-दृष्टि देना शिक्षा का ही कर्म और धर्म है। भारत का वेदकाल नीति और पर्यावरण शिक्षा का सर्वोत्कृष्ट काल है जो जियो और जीने दो की सीख देता है वहीं गाँधी शिक्षा-दर्शन सत्य, अहिंसा, सद्भावना को व्यक्ति में विकसित करते हुए स्वज्ञान, आत्मज्ञान, आत्मनिर्भरता, प्रेम व सहयोग पर आधारित जन-तंत्र लिए सम्यक, सन्तुलित भारतीय समाज के विचार और व्यवहार में सम्पूर्ण शिक्षा का केन्द्र नीति शास्त्र और मूल्यों को मानता है । यह शोध भारत के तरूणों की शिक्षा-दीक्षा में वेदकालीन प्रसंग मं गाँधीजी के शैक्षिक विचार पर चर्चा का प्रयास है कि युवाओं की उच्च शिक्षा में वेदकालीन शिक्षा के उद्देश्य ’’ गाँधी शिक्षा दर्शन ’’ में कैसे समाहित हैं ।