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October to December 2025 Article ID: NSS9471 Impact Factor:8.05 Cite Score:116 Download: 13 DOI: https://doi.org/ View PDf
बृहत्त्त्रयी महाकाव्यों की कथा-वस्तु का अध्ययन
प्रो. वेदप्रकाश मिश्र
विभागाध्यक्ष (संस्कृत एवं प्राच्य भाषा) डॉ. सी. वी. रामन् विश्वविद्यालय, करगीरोड, कोटा, बिलासपुर (छ.ग.)डॉ. नरेन्द्र प्रसाद शुक्ला
विभागाध्यक्ष (संस्कृत) सी. एम. डी. कॉलेज, बिलासपुर (छ.ग.)
शोध सारांश- संस्कृत महाकाव्यों की समृद्ध
परंपरा में किरातार्जुनीयम्, ’शिशुपालवधम्’म् और ’नैषधीयचरितम्’ को विशेष स्थान प्राप्त है। ये तीनों महाकाव्य, जिन्हें
बृहत्त्रयी के रूप में मान्यता दी गई है, भारतीय संस्कृति के उच्चतम आदर्शों और मूल्यों
को प्रतिबिंबित करते हैं। इन महाकाव्यों में न केवल कथा-कला की उत्कृष्टता है, बल्कि
इनकी रचना भारतीय समाज के विविध पहलुओं को भी उजागर करती है, जिसमें धर्म, नीति, और
नैतिकता की परिपूर्ण अभिव्यक्ति मिलती है। भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण और विशिष्ट
पहलू नारी है, जो सदैव से समाज की सांस्कृतिक, धार्मिक, और नैतिक संरचना का अभिन्न
अंग रही है। यही कारण है कि इन महाकाव्यों में नारी की भूमिका का विस्तृत और गहन वर्णन
मिलता है, जो उस समय की समाज व्यवस्था और नारी के जीवन को समझने में सहायक सिद्ध होता
है।
