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July to September 2025 Article ID: NSS9478 Impact Factor:8.05 Cite Score:109 Download: 13 DOI: https://doi.org/ View PDf
ग्रामीण आजीविका विविधीकरण एवं आय वृद्धि में नरवा-गरूवा-घुरूवा-बाड़ी योजना के प्रभाव का अध्ययन (छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर एवं धमतरी जिले का तुलनात्मक अध्ययन)
निशी ठाकुर
शोध छात्रा, अग्रसेन महाविद्यालय, रायपुर (छ.ग.)डॉ. शोभा अग्रवाल
शोध निर्देशिका एवं सहायक प्राध्यापक (वाणिज्य) अग्रसेन महाविद्यालय, रायपुर (छ.ग.)
शोध सारांश- भारत की जनसंख्या का बड़ा भाग गांवो में निवास करता है। गांवो में ग्रामीणों की आजीविका का सर्वप्रधान साधन प्रारंभ से ही कृषि रहा तथा दूसरा साधन पशुपालन। धीरे-धीरे ग्रामीण परंपराए विलुप्त होने लगी। लोग आजीविका के लिए शहरों की ओर पलायन करने लगे। छत्तीसगढ़ राज्य में गाँवों की पुरानी आर्थिक गतिवधियों को बचाने के लिए वर्ष 2019 में शासन द्वारा नरवा-गुरूवा-घुरूवा-बाड़ी योजना की शुरूआत की गई। यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करने तथा ग्रामीण परिवारों की आजीविका में स्थिरता लाने के उददे्श्य से प्रारंभ की गई। प्रस्तुत शोध पत्र में नरवा-गरूवा-घुरूवा-बाड़ी योजना की स्थिति, उपलब्धि, समस्या एवं सुझावों को प्रस्तुत किया गया हैं। अध्ययन हेतु रायपुर एवं धमतरी जिलों के 90-90 कुल 180 हितग्राहियों से प्राथमिक समंक संग्रहण किया गया है तथा द्वितीयक समंक हेतु योजना के संचालन से संबंधित विभागों से आँकडे़ संग्रहित किए गए हैं। प्राथमिक समंक हेतु लाभार्थियों से आजीविका विविधीकरण, आय वृद्धि तथा महिला सशक्तिकरण पर योजना के तुलनात्मक प्रभाव का विश्लेषण किया गया हैं। परिकल्पना परीक्षण हेतु काई-स्क्वैर परीक्षण विधि का प्रयोग किया गया हैं। परीक्षण से परिणाम प्राप्त हुए है कि योजना से ग्रामीणों की आय में वृद्धि हुई, महिलाओं का आर्थिक लाभ मिला तथा ग्रामीणों को कृषि के अलावा आजीविका के दूसरे अवसर भी उपलब्ध हुए। रायपुर एवं धमतरी जिलों में योजना से आय वृद्धि एवं आजीविका विविधीकरण के स्तर पर महत्वपूर्ण अंतर नही पाया गया हैं।
शब्द कुंजी-आजीविका विविधीकरण,
नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी, गौठान, स्व-सहायता समूह।
