• October to December 2025 Article ID: NSS9500 Impact Factor:8.05 Cite Score:7983 Download: 125 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9500 View PDf

    छत्तीसगढ़ का नामकरण एवं साहित्य में प्रयुक्त

      डॉ. माग्रेट कुजूर
        सहायक प्राध्यापक (हिन्दी) शासकीय कला विज्ञान एवं वाणिज्य महाविद्यालय, धरमजयगढ, जिला- रायगढ़ (छ.ग.)

प्रस्तावना-  छत्तीसगढ़ का नामकरण अर्वाचीन है तथा पूर्व में इस राज्य के लिए कोशल, महाकोशल, दक्षिणकोशल, चेदिशगढ़, दण्डकारण्य, महाकांतार आदि नामों से अधिष्ठित किया जाता रहा है। छत्तीसगढ़ में पाषाण युगीन मानव के द्वारा गुफा की दीवारों में अनेक शैलचित्र रेखांकित किये गये हैं। ये चित्र उनकी दैनिक जीवन की गतिविधियों व सामाजिक संस्कृति की गतिविधियों का प्रतिबिम्ब है, जिसके कारण पुरातत्ववेत्ताओं ने इस राज्य को मानवीय विकास व सभ्यता का केन्द्र बताया है।