• October to December 2025 Article ID: NSS9551 Impact Factor:8.05 Cite Score:18 Download: 4 DOI: https://doi.org/ View PDf

    नयी कविता के हस्ताक्षर मुक्तिबोध का वैचारिक बोध

      डॉ. राम सिंह सैन
        सहायक आचार्य (हिंदी) राजकीय महाविद्यालय, चौथ का बरवाड़ा, सवाई माधोपुर (राज.)

प्रस्तावना-  हिंदी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर गजानन्द माधव मुक्तिबोध ने प्रयोगवाद के साथ-साथ नयी कविता पर अपनी लेखनी को गुंजायमान किया है जो हिंदी जगत में अपनी निराली पहचान बनाये हुए है | सन 1947 में तार सप्तक के प्रकाशन के अनन्तर प्रयोगवाद नाम बहुत प्रचलित था | सांस्कृतिक पृष्ठभूमि ने कविता को नये बदलाव को प्रतिष्ठित किया | प्रयोगवाद और उसके बाद नयी  कविता का सन 1951 में उदय हुआ मुक्तिबोध ने अंतरराष्ट्रीय सामाजिक आर्थिक के काव्य और शिल्प के धरातल पर नयेपन की आधारशिला रखी | किन्तु उनकी वैचारिक शीलता ने वादमुक्त समाज का निर्माण किया | जिसकी चरम परिणति हम नकेनवाद में देखते है | इसी के बाद विकसित काव्य प्रवृति का उन्मेष हुआ | जिसे हम “नयी कविता” के नाम से अभिहित करते है |