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October to December 2025 Article ID: NSS9559 Impact Factor:8.05 Cite Score:1154 Download: 47 DOI: https://doi.org/ View PDf
किशोर विद्यार्थियों के आत्मसम्मान और शैक्षिक उपलब्धि के मध्य अंतर्संबंधों का सैद्धांतिक एवं व्याख्यात्मक विश्लेषण
अनिल गुर्जर
शोधार्थी, जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड-टू-बी) विश्वविद्यालय, उदयपुर (राज.)डॉ. हरिश्चंद्र चौबीसा
सहायक आचार्य (शिक्षा) जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड-टू-बी) विश्वविद्यालय, उदयपुर (राज.)
शोध सारांश- प्रस्तुत
शोध पत्र किशोर विद्यार्थियों के आत्मसम्मान और शैक्षिक उपलब्धि के मध्य
अंतर्संबंधों का सैद्धांतिक एवं व्याख्यात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
आत्मसम्मान व्यक्ति की आत्म-धारणा, आत्म-स्वीकृति और आत्म-मूल्यांकन का वह
मनोवैज्ञानिक आयाम है जो उसकी प्रेरणा, आत्म-नियंत्रण और शैक्षणिक प्रदर्शन को
प्रभावित करता है। किशोरावस्था में आत्मसम्मान का विकास न केवल भावनात्मक स्थिरता
का द्योतक है, बल्कि यह शैक्षिक सफलता की आधारशिला भी बनता है। इस अध्ययन में
रॉजर्स के स्व-अवधारणा सिद्धांत, मास्लो के आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत,
कूपर्स्मिथ के आत्मसम्मान मॉडल, हार्टर के आत्म-मूल्य सिद्धांत तथा डेसी एवं रयान
के संज्ञानात्मक मूल्यांकन सिद्धांत को आधार बनाकर आत्मसम्मान के सैद्धांतिक ढाँचे
को व्याख्यायित किया गया है। साहित्य समीक्षा से यह निष्कर्ष प्राप्त हुआ कि
आत्मसम्मान और शैक्षिक उपलब्धि के मध्य एक सशक्त द्विपक्षीय संबंध विद्यमान है-
उच्च आत्मसम्मान विद्यार्थियों में आत्म-विश्वास, प्रेरणा और संज्ञानात्मक सक्षमता
को बढ़ाता है, जबकि शैक्षणिक सफलता पुनः उनके आत्मसम्मान को सुदृढ़ करती है।
भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय शोधों के तुलनात्मक विश्लेषण से यह भी स्पष्ट हुआ कि
आत्मसम्मान का स्तर पारिवारिक समर्थन, सामाजिक मान्यता और व्यक्तिगत उपलब्धियों से
गहराई से जुड़ा हुआ है। अध्ययन का निष्कर्ष यह प्रतिपादित करता है कि
शिक्षा-प्रणाली में आत्मसम्मान के संवर्धन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिससे
किशोर विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व, मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक
उत्कृष्टता का संतुलित विकास संभव हो सके।
शब्द कुंजी-आत्मसम्मान, शैक्षिक उपलब्धि, किशोर विद्यार्थी,
आत्म-धारणा, आत्म-स्वीकृति, प्रेरणा, सैद्धांतिक विश्लेषण, मनोवैज्ञानिक
परिप्रेक्ष्य।
