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January to March 2026 Article ID: NSS9574 Impact Factor:8.05 Cite Score:14 Download: 3 DOI: https://doi.org/ View PDf
महिला वार्धक्य एवं मानसिक स्वास्थ्य
डॉ. कलिका डोलस
प्राध्यापक (गृहविज्ञान) शा. कन्या महाविद्यालय, सीहोर (म.प्र.)
प्रस्तावना - वार्धक्य मानव जीवन की एक ऐसी सच्चाई है जिसे झुठलाया
नहीं जा सकता। मानव जीवन चक्र की जो अवधारणा है उनमें अंतिम अवस्था वार्धक्य है। यह
एक प्राकृतिक अवस्था है जो शनैः शनैः आती है। युवावस्था के मद में चूर नर-नारी इस भ्रम
में जीते हैं कि वे सदैव ही युवा रहेंग परंतु शीघ्र ही जैसी ही 50 वर्ष की आयु को प्राप्त
करते हैं उन्हें अपने वार्धक्य का अनुभव होने लगता है। वार्धक्य से ही वृद्धा शब्द
बना है एवं इस अवस्था को वृद्धावस्था कहते हैं, वृद्ध का शाब्दिक अर्थ है, पका हुआ,
बड़ा हुआ या अथवा परिपक्व।
