• January to March 2026 Article ID: NSS9575 Impact Factor:8.05 Cite Score:13 Download: 3 DOI: https://doi.org/ View PDf

    ‘राम की शक्ति पूजा’ कविता में निराला के राम

      नटवर भाम्बी
        सहायक आचार्य (हिन्दी) श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय, कल्याणलोक जावदा, निम्बाहेड़ा (राज.)

शोध सारांश-  सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की कविता ‘राम की शक्तिपूजा’  में राम का स्वरूप पारंपरिक दैवीय मर्यादाओं से मुक्त होकर एक गहरे मानवीय और बहुआयामी चरित्र के रूप में उभरता है। निराला आधुनिक चेतना से प्रेरित होकर ईश्वर का मानवीकरण करते हैं, जहाँ राम संशय, भय, पराजय-बोध, आत्मग्लानि और असमर्थता जैसी मानवीय मनःस्थितियों से गुजरते हैं। वही राम कवि निराला के अपने जीवन-संघर्ष, आत्मपीड़ा और असफलताओं के  प्रतीक भी बन जाते है। कविता में सीता-मुक्ति के माध्यम से नारी-मुक्ति की चेतना व्यक्त होती है और राम एक संवेदनशील पति के रूप में सामने आते हैं। साथ ही राम राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन के नायक, विशेषतः गांधी, के प्रतीक रूप में भी देखे जा सकते हैं, जहाँ शक्ति का प्रश्न नैतिकता से जुड़ता है। राम–रावण संघर्ष सत्य–असत्य और धर्म–अधर्म के शाश्वत द्वंद्व का रूप ले लेता है। इस प्रकार निराला के राम ‘नवीन पुरुषोत्तम’ है, जो आधुनिक, दार्शनिक और प्रतीकात्मक अर्थों से समृद्ध है।

शब्द कुंजी-संशय, पराजय-बोध, आत्मग्लानि, शक्ति-साधना, आत्मसंघर्ष, नारी-मुक्ति, राष्ट्रीय चेतना, रामत्व–रावणत्व, मानवीकरण, धर्म–अधर्म, सत्य–असत्य ।