• January to March 2026 Article ID: NSS9576 Impact Factor:8.05 Cite Score:14 Download: 3 DOI: https://doi.org/ View PDf

    नवीन शिक्षा नीति में शोध और तथ्य विश्लेषण

      डॉ. श्वेता तेवानी
        सहायक प्रोफेसर (राजनीति विज्ञान) पीएमसीओई, सरकारी कला एवं विज्ञान महाविद्यालय, रतलाम (म.प्र.)
       

शोध सारांश-  भारत की नई शिक्षा नीति 2020 (NEP-2020) विद्यार्थियों में शोध को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। नई शिक्षा नीति भारत को ‘विश्व गुरु’ बनाने के लक्ष्य के साथ अनुसंधान को बढ़ावा देने पर ज़ोर देती है। नवीन ज्ञान की प्राप्ति हेतु किए गए व्यवस्थित प्रयास को शोध कहा जाता है। कई बार छोटे स्तर पर किया गया शोध भी मील का पत्थर साबित होता है। भारत की नवीन शिक्षा नीति का उद्देश्य अध्ययनरत विद्यार्थियों में अनुसंधान को बढ़ावा देना और नवाचार के लिए प्रेरित करना है। किसी भी शोध, अनुसंधान या अध्ययन में ‘तथ्य’ अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। किसी भी अनुसंधान, शोध या नवाचार का प्राथमिक और महत्वपूर्ण चरण होता है तथ्यों का एकत्रीकरण। किंतु मात्र तथ्यों के एकत्रित करने से शोध के लक्ष्य की प्राप्ति नहीं की जा सकती। इसके लिए तथ्यों का विश्लेषण आवश्यक है।

            तथ्य विश्लेषण से अभिप्राय है किसी घटना, विचार या विषय विशेष के अध्ययन के लिए एकत्रित किए गए तथ्यों का विश्लेषण। अनुसंधान कार्य में तथ्यों का विश्लेषण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, किंतु संकलन मात्र किसी उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर सकता। अतः सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्य संकलित तथ्यों को सुव्यवस्थित कर उनका विश्लेषण करना है। इस विचार को स्पष्ट करने के लिए प्रख्यात फ्रेंच गणित शास्त्री श्री जुलेस हेनरी प्वाइनकेयर (Jules Henri Poincaré) का कथन उपयुक्त सिद्ध होता है कि,- “जिस प्रकार एक भवन का निर्माण शिलाखंडों से होता है उसी प्रकार विज्ञान का निर्माण तथ्यों से होता है, परंतु मात्र तथ्यों का संकलन उसी प्रकार विज्ञान नहीं है जैसे कि शिलाखंडों का एक ढेर भवन नहीं है।” अतः तथ्यों के पीछे जो कुछ छुपा हुआ है उनका प्रकटीकरण करने के लिए विश्लेषण आवश्यक है। संकलित तथ्यों से निष्कर्ष निकालना अनुसंधान का आधारभूत उद्देश्य होता है तथा विश्लेषण के बिना यह संभव नहीं है। विश्लेषण के अभाव में संकलित तथ्य अर्थहीन रहेंगे तथा शोध या अनुसंधान कार्य अधूरा रह जाएगा। अतः श्रीमती पी.वी. यंग ने वैज्ञानिक विश्लेषण को ‘शोध का रचनात्मक पक्ष’ कहा है।    

    यह स्पष्ट है कि पुराने सिद्धांतों या नियमों की परीक्षा करने, नवीन सिद्धांतों या नियमों का प्रतिपादन करने या पुराने सिद्धांतों व नियमों को गलत प्रमाणित करने के लिए एकत्रित तथ्यों का विश्लेषण आवश्यक है। तथ्य स्वयं मूक होते हैं वे कुछ नहीं कहते; किंतु उनका क्रमबद्ध व व्यवस्थित विश्लेषण कर उन्हें मुखरित किया जा सकता है। तथ्य विश्लेषण एक वैज्ञानिक, विशिष्ट, क्रमबद्ध, एवं व्यवस्थित प्रक्रिया है, जो कि शोध या अनुसंधान की लक्ष्य प्राप्ति या उद्देश्य की पूर्ति के लिए अति आवश्यक है।

अध्ययन पद्धति: विश्लेषणात्मक, वर्णनात्मक, ऐतिहासिक

शब्द कुंजी-शोध, अनुसंधान, तथ्य, विश्लेषण, विश्लेषणकर्ता।