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January to March 2026 Article ID: NSS9581 Impact Factor:8.05 Cite Score:17 Download: 4 DOI: https://doi.org/ View PDf
कार्यरत महिलाओं की दोहरी भूमिका और सामाजिक चुनौतियाँ: एक व्यापक समाजशास्त्रीय अध्ययन
डॉ.सोनिका बघेल
सहा.प्राध्यापक (समाज शास्त्र) शासकीय आदर्श महाविद्यालय, हरदा (म.प्र.)
शोध सारांश- आधुनिक
भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति में व्यापक परिवर्तन हुआ है। शिक्षा, औद्योगीकरण,
नगरीकरण,
वैश्वीकरण तथा लोकतांत्रिक मूल्यों
के विस्तार ने महिलाओं को सार्वजनिक एवं आर्थिक क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी का
अवसर प्रदान किया है। महिलाएँ आज प्रशासन,
शिक्षा,
स्वास्थ्य,
उद्योग,
सूचना-प्रौद्योगिकी, बैंकिंग,
राजनीति एवं सेवा क्षेत्र सहित
विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। तथापि सामाजिक संरचना में
घरेलू कार्यों एवं पारिवारिक दायित्वों की प्रमुख जिम्मेदारी अब भी महिलाओं पर
केंद्रित है। परिणामस्वरूप कार्यरत महिलाओं को दोहरी भूमिका निभानी पड़ती है-एक ओर वे पेशेवर उत्तरदायित्वों का
निर्वहन करती हैं, दूसरी
ओर पारिवारिक एवं घरेलू दायित्वों को भी निभाती हैं।
यह लेख कार्यरत महिलाओं की दोहरी
भूमिका, भूमिका-संघर्ष, मानसिक एवं शारीरिक प्रभाव, पारिवारिक संबंधों पर प्रभाव, सामाजिक असमानता, ग्रामीण-शहरी परिप्रेक्ष्य तथा
समाधान की संभावनाओं का विस्तृत समाजशास्त्रीय विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन
से स्पष्ट होता है कि आर्थिक सशक्तिकरण के बावजूद लैंगिक भूमिकाओं की पारंपरिक
संरचना महिलाओं के लिए अनेक चुनौतियाँ उत्पन्न करती है। सामाजिक दृष्टिकोण में
परिवर्तन, संस्थागत
सहयोग और घरेलू उत्तरदायित्वों के समान वितरण के बिना महिलाओं की वास्तविक समानता
संभव नहीं है।
शब्द कुंजी-कार्यरत महिलाएँ, दोहरी भूमिका, भूमिका-संघर्ष, पितृसत्ता, कार्य-जीवन
संतुलन, लैंगिक
समानता।
