• January to March 2026 Article ID: NSS9589 Impact Factor:8.05 Cite Score:18 Download: 4 DOI: https://doi.org/ View PDf

    आत्मनिर्भर भारत और महिलाओं की बदलती भूमिका (विश्लेषणात्मक अध्ययन)

      डॉ. मनिता कौर विरदी
        सहायक प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष (राजनीति विज्ञान) शासकीय महाविद्यालय, बिछुआ, छिंदवाड़ा (म.प्र.)

शोध सारांश-  आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महिलाओं की भूमिका केवल भागीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि वे इस अभियान की धुरी बनकर उभरी हैं। आज महिलाएं घर की चारदीवारी से निकलकर देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना को मजबूत कर रही हैं।वर्तमान समय में महिलाओं की हिस्सेदारी समाज के सभी क्षेत्रांे में है। महिलाओं ने वर्तमान में घर काम से लेकर विज्ञान के क्षेत्र में भी अपनी अहम भूमिका निभाई है। इतना नहीं आज महिलाओं ने षिक्षा, व्यापार, उद्योग, कृषि, बैकिंग जैसे क्षेत्रांे में भी अपनी अहम भूमिका का निर्वहन किया है। सषक्त समाज से सषक्त राष्ट्र का निर्माण होता है। महिलाएँ समाज का अहम हिस्सा (अंग) है। वर्तमान समय में महिला, उद्योग में पुरूषों के समान कार्य कर रही है। वर्तमान समय में भारत में आर्थिक व सामाजिक क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों से आर्थिक विकास का क्षेत्र बढता जा रहा है। उद्यमियों का समाज व्याप्त आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक कारकों पर निर्भर करता है। आत्मनिर्भर भारत में महिलाओं के योगदान ने सामाजिक सुधार, महिलाओं के बाल विवाह, दहेज प्रथा और जातिवाद जैसी सामाजिक कुरीतियांे के खिलाफ आवाज उठाई है। आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर महिलाएँ अपनी जरूरतों और सपनों को पूरा करने के लिये दूसरों पर निर्भर नहीं रहती। यह उन्हें अपने परिवार की विŸाीय स्थिति में योगदान करने का अवसर देता है। आर्थिक स्वतंत्रता महिलाओं को आत्मनिर्भरता के साथ-साथ आत्मविष्वास प्रदान करती है और उन्हें अपने जीवन के बडे फैसले लेने में सक्षम भी बनाती है। महिलाआंे की आत्मनिर्भरता से उनका मनोबल बढ़ता है। यह उन्हें अपने जीवन के सभी क्षेत्रों में स्वतंत्रता और आत्मविष्वास देता है। आत्मनिर्भर महिला समाज में बदलाव लाने में सक्षम होती है और अपनी पहचान बनाने में सफल रहती है।

शब्द कुंजी-आत्मनिर्भरता, अर्थव्यवस्था,स्वतंत्रता, उद्यमिता।