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January to March 2026 Article ID: NSS9597 Impact Factor:8.05 Cite Score:897 Download: 39 DOI: https://doi.org/ View PDf
भारतीय ज्ञान परम्परा : एक गौरवशाली विरासत - एक विश्लेषण
डॉ. ज्योति सिंह
सहायक प्राध्यापक (समाजशास्त्र) शासकीय स्नातक महाविद्यालय, नैनपुर, जिला मंडला (म.प्र.)
शोध सारांश- भारतीय ज्ञान परम्परा विश्व की प्राचीनतम और समृद्ध ज्ञान
प्रणालियों में से एक है। यह परम्परा वेद, उपनिषद, महाकाव्य, दर्शन, आयुर्वेद, योग,
गणित और शिक्षा प्रणाली जैसे विविध आयामों से विकसित हुई है। भारतीय चिंतन में ज्ञान
का उद्देश्य केवल बौद्धिक विकास नहीं, बल्कि आत्मबोध, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व
की स्थापना है। “सत्य, “अहिंसा, “धर्म और “वसुधैव कुटुम्बकम्”
जैसे मूल्यों ने भारतीय समाज को एकता और संतुलन प्रदान किया है।
इस शोध पत्र में भारतीय ज्ञान परम्परा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि,
प्रमुख दार्शनिक धाराओंकृसांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा और वेदान्तकृका विश्लेषण
किया गया है। साथ ही गुरुकुल शिक्षा प्रणाली, वैज्ञानिक एवं गणितीय योगदान तथा आधुनिक
समय में इसकी प्रासंगिकता पर भी चर्चा की गई है। वर्तमान वैश्वीकरण के युग में मानसिक
तनाव, नैतिक संकट और सांस्कृतिक विघटन जैसी चुनौतियों के समाधान हेतु भारतीय ज्ञान
परम्परा उपयोगी सिद्ध हो सकती है।
अतः यह स्पष्ट है कि भारतीय ज्ञान परम्परा केवल अतीत की
धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के निर्माण की आधारशिला है। इसके संरक्षण, संवर्धन
और समकालीन संदर्भ में पुनर्पाठ की आवश्यकता है, ताकि यह विश्व मानवता के कल्याण में
पुनः प्रभावी भूमिका निभा सके।
शब्द कुंजी-भारतीय ज्ञान परम्परा,
वेद, उपनिषद, दर्शन, गुरुकुल शिक्षा, आयुर्वेद, योग, नैतिक मूल्य, सांस्कृतिक विरासत,
वसुधैव कुटुम्बकम्, भारतीय दर्शन, संरक्षण।
