• January to March 2026 Article ID: NSS9614 Impact Factor:8.05 Cite Score:193 Download: 18 DOI: https://doi.org/ View PDf

    स्वामी दयानन्द सरस्वती का योगदान विचारों और क्रियाकलापों का विश्लेषण

      राकेश कुमार जीनगर
        सहायक आचार्य, आर एन टी कॉलेज कपासन, चित्तौडगढ़ (राज.)

शोध सारांश- उन्नीसवीं सदी में हिन्दू समाज विभिन्न सामाजिक कुरीतियों से ग्रस्त था। जिनके कारण समाज नैतिक और   सांस्कृतिक रूप से कमजोर पड़ रहा था। ऐसे समय में स्वामी दयानन्द सरस्वती ने समाज में सुधार लाने और राष्ट्रीय भावना को जागृत करने में अहम भूमिका निभाई। उन्हें भारत में पुनरुत्थान आंदोलन का लूथर कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने लूथर के प्रसिद्ध आह्वान बाइबल की ओर लौटें की भांति वेदों की ओर लौटो का नारा दिया।

स्वामी दयानन्द ने हिन्दू समाज को शुद्ध करने और अंधविश्वास की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए सक्रिय अभियान छेड़ा। उनके प्रयासों से स्थापित आर्य समाज एक प्रभावशाली सुधार आंदोलन बना। इससे पहले, ब्रह्म समाज नामक आंदोलन पश्चिमी सभ्यता से प्रभावित एक रक्षात्मक प्रयास था, जो हिन्दू धर्म की मूल भावना को पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर सका।

स्वामी दयानन्द सरस्वती के उग्र और साहसिक सुधारवादी दृष्टिकोण ने समाज को नया मार्गदर्शन दिया। उनके नेतृत्व में आर्य समाज का गठन हुआ, जिसने उन लोगों का विश्वास जीता जो पहले ब्रह्म समाज के प्रति शंकालु थे। स्वामी दयानन्द के विचारों का आधार प्राचीन भारतीय दर्शन और संस्कृति थी, जिसने समाज को अपनी जड़ों की ओर लौटने के लिए प्रेरित किया।

शब्द कुंजी-पुनुरूत्थान, राष्ट्रवाद, पुनरूत्थान आंदोलन, ब्रह्म समाज, आर्य समाज, अंधविश्वास, पाश्चात्य संस्कृति।