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January to March 2026 Article ID: NSS9624 Impact Factor:8.05 Cite Score:73 Download: 10 DOI: https://doi.org/ View PDf
अदि पर्व - ‘‘तापस्य वेस‘‘
डॉ. मनिषा सिंह मरकाम
सहायक प्राध्यापक (हिन्दी) प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस श्री अटल बिहारी वाजपेयी, शास. कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, इन्दौर (म.प्र.)
प्रस्तावना- सत्यवती हमारे पवित्र ग्रथ महाभारत की प्रमुख
पात्र है। जो हस्तिनापुुर के सम्राट शांतनु की पत्नी थी। सत्यवती उनका वह नाम बहुत
बाद में रखा गया। उनका नाम मत्स्य गंधा था क्योकि वह मछली के गर्भ से उत्पन्न हुई था।
वह अतीव सुन्दरी थी किन्तु उनके शरीर से मछली की गंध आती थी उनके पिता मछली पकड़ने वाले
(धीवर) थे इसलिए वह अपने पिता के कार्यो में मद्दत करने के कारण उनका भी रोजमर्रा का
कार्य नाव चलाना था एवम् वह नि-प्रति यात्रियों को नदी पार करवाती थी। नियति का अपना
अलग ही विधान होता है। यहाँ एक प्रश्न यह भी उपस्थित होता है कि सत्यवती अत्यन्त तेजस्वी
स्त्री थी फिर पराशर ऋषि के पहले कोई अन्य पुरूष उन पर आसक्त क्यों नही हो पाया इसका
एक कारण यह भी हो सकता है कि सामान्य पुरूष उनके शरीर में बसी मछली की गंध को सहन नही
कर पाता हो। दूसरा कारण यह भी हो सकता है? कि एक तेजस्वी स्त्री को एक तेजस्वी पुरूष
ही पा सकता है। नियति ने तो तय कर रखा था कि ऋषि पाराशर के संग के बाद ही मत्स्यगंधा
सत्यवती बन पाएँगी। ऋषि पाराशर की तेजस्विता, ओजस्विता शरीर सौष्ठव एक सामान्य पुरूष
नही पा सकता। दोनों ही सौंदर्य और ज्ञान के प्रकंाण्ड विद्वान थे। दोनो ही, एक दूसरे
के लिए योग्य थे। इसलिए दोनों की सहभागिता से ही मिलन संभव हो पाया और एक नया इतिहास
महर्षि वेद व्यास का जम्म हुआ।
