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October to December 2025 Article ID: NSS9625 Impact Factor:8.05 Cite Score:11 Download: 3 DOI: https://doi.org/ View PDf
पटकथा लेखन फीचर फिल्म
डॉ. बिन्दू परस्ते
सहायक प्राध्यापक (हिन्दी) प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस श्री अटल बिहारी वाजपेयी, शास. कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, इन्दौर (म.प्र.)
प्रस्तावना- बडे पर्दे की फिल्म अथवा
छोटे पर्दे दूरदर्शन के लिए किसी भी फिल्म, टेलीफिल्म आदि के लिए एक कहानी की आवश्यकता
होती है। साहित्य में कहानी सर्वाधिक लोकप्रिय विधा है, परन्तु दृष्य माध्यमों के लिए
लिखी गई कहानी का स्वरूप प्रिन्ट माध्यम की अपेक्षा विकल्प ही अलग किस्म का होता है।
यही कारण है कि प्रिन्ट माध्यमों के अनेकों महान साहित्यकार दृष्य माध्यमों में पूरी
तरह असफल हो गये। ऐसे लोगों में मुंशी प्रेमचंद, भगवती चरण वर्मा, सुदर्शन, जैनेन्द्र
कुमार तथा कमलेश्वर जैसे महान साहित्यकारों का नाम ससम्मान लिया जा सकता है। कमलेश्वर
जी के उपन्यास फिर भी ‘पर फिल्म निर्माण हेतु एक अभिनत प्रयोग किया गया था। इसमें मूल
कहानी में बिना किसी परिवर्तन के फिल्म बनाई गई थी, वह फिल्म बुरी तरह बाक्स आॅफिस
पर पिट गई थी। यही हाल जैनेन्द्र कुमार की कहानी ‘त्यागपत्र‘ का भी
हुआ, जिसमें उन्होंने अपने सामने ही पटकथा लिखवाई थी ताकि उसमें कोई परिवर्तन नही किया
जा सके। इस तरह के अनेको उदाहरण है।
