• October to December 2025 Article ID: NSS9633 Impact Factor:8.05 Cite Score:4 Download: 1 DOI: https://doi.org/ View PDf

    डिजिटल युग में जनजातीय सांस्कृतिक अभिव्यक्ति

      डॉ. मनीषा सिंह मरकाम
        सहा. प्राध्यापक (हिन्दी) प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेस, श्री अटल बिहारी वाजपेयी, शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, इंदौर (म.प्र.)
      शांता चैहान
        शोधार्थी (हिन्दी) प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेस, श्री अटल बिहारी वाजपेयी, शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, इंदौर (म.प्र.)

शोध सारांश-  इक्कीसवीं सदी को डिजिटल युग के रूप में जाना जाता है। डिजिटल युग वह समय है जिसमें कम्प्यूटर ‘इन्टरनेट’ स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफार्म मानव जीवन के अभिन्न अंग बन गये है। इस युग में ज्ञान का संरक्षण, संप्रेषण और प्रचार डिजिटल माध्यमों के द्वारा तीव्र गति से होने लगा है। डिजिटल युग में सांस्कृतिक संरचना को बहुत ही गहराई से प्रभावित किया है। जनजातीय समाज जो परंपरागत रूप से मौखिक परंपरा, लोकगीत, लोकनृत्य, कला, पर्व, त्यौहार एवं प्रकृति जीवनशैली पर आधारित रहे है। आंरभ में जनजातीय समाज डिजिटल माध्यमों से दूर रहा है, किन्तु शिक्षा, संचार और सरकारी पहलों के माध्यम से धीरे-धीरे यह समुदाय डिजिटल दुनिया से जुडने लगा है और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के नये-नये रूप गढ़ रहे है। मोबाईल -इन्टरनेट, सोशल मीडिया के माध्यम से जनजातीय युवक -युवतियाँ अपनी सांस्कृतिक पहचान को बना रहे है।

शब्द कुंजी- डिजिटल युग, सोशल मीडिया, लोक परंपरा, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति।