• January to March 2026 Article ID: NSS9635 Impact Factor:8.05 Cite Score:39 Download: 6 DOI: https://doi.org/ View PDf

    ग्रामीण एवं शहरी संदर्भ में अनुसूचित जाति की सामाजिक गतिशीलता का तुलनात्मक विश्लेषण

      दिनेश तायडे
        शोधकर्ता, समाजकार्य एवं समाजशास्त्र अध्ययनशाला, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन (म.प्र.)
      डॉ. ज्योति उपाध्याय
        शोध निर्देशिका, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन (म.प्र.)

शोध सारांश- भारतीय समाज में सामाजिक गतिशीलता को सामाजिक परिवर्तन और समान अवसरों की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण अवधारणा माना जाता है। अनुसूचित जाति, जो ऐतिहासिक रूप से सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक वंचना का सामना करती रही है, उनके संदर्भ में सामाजिक गतिशीलता का अध्ययन विशेष महत्व रखता है। ग्रामीण और शहरी परिवेश सामाजिक संरचना, संसाधनों की उपलब्धता, रोजगार के अवसर तथा सामाजिक संपर्कों के स्तर पर भिन्न होते हैं, जिसका सीधा प्रभाव सामाजिक उन्नयन की संभावनाओं पर पड़ता है। प्रस्तुत शोध-पत्र में ग्रामीण एवं शहरी संदर्भ में अनुसूचित जाति की सामाजिक गतिशीलता का तुलनात्मक विश्लेषण पूर्ववर्ती अध्ययनों, सैद्धांतिक अवधारणाओं तथा नीतिगत विमर्श के आधार पर किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि शहरी क्षेत्रों में अवसरों की विविधता और संस्थागत संरचना सामाजिक उन्नयन को अपेक्षाकृत गति प्रदान करती है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक संरचनाएँ और सीमित संसाधन गतिशीलता को प्रभावित करते हैं।