-
January to March 2026 Article ID: NSS9642 Impact Factor:8.05 Cite Score:25 Download: 5 DOI: https://doi.org/ View PDf
भारतीय चुनाव आयोग के कार्य, शक्तियाँ एवं मुख्य चुनौतियाँ और समाधानः वर्तमान संदर्भ में विश्लेषणात्मक अध्ययन
डॉ. जे. के. संत
सहायक प्राध्यापक(राजनीति विज्ञान) शासकीय तुलसी महाविद्यालय, अनूपपुर (म.प्र.)
शोध सारांश- भारत निर्वाचन आयोग जिससे चुनाव आयोग के नाम से भी जाना
जाता हैं। यह एक स्वायत्त संवैधानिक निकाय जो भारत में संघ और राज्य चुनाव प्रक्रियाओं
का संचालन करता है। भारत एक विशाल लोकतांत्रिक गणराज्य है, जहां जन-प्रतिनिधियों का
चयन निष्पक्ष प्रक्रिया द्वारा होता है। निर्वाचन से संबंधित समस्त व्यस्था के संचालन
का दायित्व भारत चुनाव आयोग पर है। यह भारतीय संविधान का भाग 15 चुनाव से संबंधित है।
चुनाव आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को संविधान के अनुसार की गई थी। यह संविधान के
अनुच्छेद 324 से 329 तक चुनाव आयोग और सदस्यों की शक्तियों, कार्य, कार्यकाल और पात्रता
आदि से संबंधित है।चुनाव आयोग में मूलतः केवल एक चुनाव आयोग का प्रावधान था, लेकिन
अब इसे तीन सदस्यीय बना दिया गया है, मुख्य आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की
जाती है तथा चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति भी राष्ट्रपति ही करता है, इनका कार्यकाल
6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (दोनों में से जो भी पहले हो) तक होता है। आयेाग का मुख्यालय
नई दिल्ली में स्थित है। इस अध्ययन में भारत के निर्वाचन आयोग के स्थापना उसका महत्व
इसके विभिन्न कार्य शक्तियाँ वर्तमान चुनौतियाँ पर चर्चा कर उसके समाधान के प्रयास
किया गया है। चुनाव आयोग केवल एक संवैधानिक संस्था नही है, बल्कि यह भारतीय नागरिकों
की लोकतांत्रिक इच्छाशक्ति का संरक्षक है। इसकी स्वायत्तता की रक्षा करना और इसे आधुनिक
चुनौतियों के अनुरूप ढालना समय की सबसे बड़ी मांग है।
शब्द कुंजी-राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति,
राज्यपाल, राज्यसभा, लोकसभा, लोकतांत्रिक, संवैधानिक, निर्वाचन आयोग, शक्तियाँ और चुनौतियाँ
।
