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January to March 2026 Article ID: NSS9647 Impact Factor:8.05 Cite Score:15 Download: 2 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9647 View PDf
भारत-चीन संबंध: राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौती से जूझता भारत
डॉ. नीरज कुमार
सहायक प्राध्यापक (राजनीति विज्ञान), शासकीय राजनारायण स्मृति महाविद्यालय, बैढ़न, जिला-सिंगरौली (म.प्र.)
प्रस्तावना- एक समय था जब भारत में सीमा
पर खतरे के रूप में रूस को देखा जाता था। यह ब्रिटेन और रूस के बीच साम्राज्यवादी प्रतिद्वंद्विता
के कारण होता था। ऐसे में तिब्बत को दोनों में से कोई नहीं चाहता था कि दूसरा उस पर
प्रभुत्व स्थापित करे। इसलिए दोनों तिब्बत पर चीन की प्रभुत्ता स्वीकार करते थे और
चीन के मध्यम से ही उससे संबंध स्थापित करने का सहमति जताते थे। चीन भारत की आजादी
तक इस स्थिति में नहीं था कि भारत पर शासन कर रहे ब्रिटेन को चुनौती दे पाए। ब्रिटेन
का भारत से जाने के बाद और भारत की आजादी के दो साल बाद ही चीन में साम्यवादी तानाशाही
की स्थापना के साथ ही भारत-तिब्बत सीमा पर चीन से चुनौती मिलने लगी। फिर भी 1954 में
पंचशील को मान्यता देने से लेकर 1958 के बीच के चार साल के काल को भारत-चीन दोस्ती,
का काल कहा जाता है जिसमें हिन्दी-चीनी भाई-भाई का नारा लगाया जाता था। 1958 में चाइना
पिक्टोरियल द्वारा प्रकाशित चीन के मानचित्रों में भारत के उत्तर-पूर्व के लगभग
36,000 वर्गमील और उत्तर-पश्चिम के लगभग 12000 वर्गमील प्रदेश को चीन के भाग के रूप
में दिखाया गया।
