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July to September 2025 Article ID: NSS9258 Impact Factor:8.05 Cite Score:9401 Download: 134 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9258 View PDf
भारतीय परिप्रेक्ष्य में वृद्धावस्था की सामाजिक चुनौतियाँ: एक समकालीन विश्लेषण
डॉ. श्रुति त्रिपाठी
सहेयक प्रोफेसर (समाजशास्त्र) क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय, गुना (म.प्र.)
प्रस्तावना - वृद्धावस्था जीवन का ऐसा चरण है जहाँ व्यक्ति भौतिक, मानसिक तथा सामाजिक रूप से सक्रिय भूमिका कम निभाने लगता है। यद्यपि वह सक्रिय भूमिका नहीं निभाता, पर समाज में पूर्व में निभाई गई महत्त्वपूर्ण भूमिका के आधार पर विश्रांति और सम्मान की कामना करता है। भारतीय संस्कृति में इस अवस्था को 'संन्यास आश्रम' के रूप में देखा गया है, जहाँ अनुभव, ज्ञान और धार्मिक चेतना की विशेष भूमिका होती है। परंतु बदलती आर्थिक-सामाजिक व्यवस्था, शहरीकरण, विघटित होते पारिवारिक ढाँचे तथा प्रतिस्पर्धात्मक जीवन शैली ने वृद्धजनों की सामाजिक स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
यह शोध-पत्र आधुनिक भारतीय समाज में वृद्धावस्था से संबंधित सामाजिक, आर्थिक तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का विश्लेषण करता है और समाधान की संभावनाओं पर चर्चा करता है।
