• October to December 2025 Article ID: NSS9438 Impact Factor:8.05 Cite Score:5887 Download: 107 DOI: https://doi.org/ View PDf

    धार्मिक स्थलों के विकास कार्य (धार्मिक नगर चित्रकूट के विशेष सन्दर्भ में)

      डॉ. राजेश कुमार सिंह तिवारी
        सहा. प्रा. (वाणिज्य) राजभान सिंह स्मा. महाविद्यालय, मनिकवार, जिला रीवा (म.प्र.)

प्रस्तावना- भारत एक धर्म प्रधान देश है विंध्य की पवित्र धरती में अनेक तीर्थ मौजूद है जो हमारी संास्कृतिक आस्था सामाजिक समरसता और आर्थिक गतिविधियों के केन्द्र है, धार्मिक नगर चित्रकूट त्रेता युग के भगवान श्रीराम से सम्बन्ध रखता है। बनवास के समय श्रीराम सीता और लक्ष्मण चित्रकूट पधारे थे तथा वही पर बनवास का समय व्यतीत करने का निर्णय लिया था, किन्तु भाई भरत के चित्रकूट पहॅुंचने और श्रीराम को अयोध्या का राजतंत्र स्वीकार करने का कहा इस पर श्रीराम चित्रकूट मे रह कर बनवास के समय में इसे अवरोध माना और यहाॅं से चलकर पंचवटी पहुचें।

    चित्रकूट एक विशेष धार्मिक नगरी है यहाॅ हर भारतीय की श्रद्धा जुडी हुई है। समाज के आकांक्षाओं के अनुरूप शासन ने चित्रकूट का विशेष विकास करने का निर्णय लिया है। यहाॅं अमावास्या के दिन लगभग 5 लाख और अन्य दिन लगभग 20 हजार श्रद्धालु पहुॅंचते है तथा दीपावली के अवसर पर 35 से 40 लाख श्रद्धालु आते है। धार्मिक स्थलों का विकास करने से समाज की समस्त अभिलाषाएॅं पूरी होती है।