• July to September 2025 Article ID: NSS9554 Impact Factor:8.05 Cite Score:59 Download: 9 DOI: https://doi.org/ View PDf

    मध्यप्रदेश की इथनों खाद्य फसलों का अध्ययन

      डॉ. राजेश बकोरिया
        सहायक प्राध्यापक (वनस्पति शास्त्र) शा. कन्या महाविद्यालय, सीहोर (म.प्र.)

शोध सारांश-  भारत प्राचीन काल से ही कृषि प्रधान देश रह है और यहा की सभ्यता और संस्कृति का विकास खेती, प्रकृति और भोजन के इर्द-गिर्द हुआ है। भारत की विविध जलवायु, मिट्टी और भौगालिक परिस्थितियों के कारण यहा की विभिन्न प्रकार की फसलें उगाई जाती रही है। इन फसलों में कुछ फसलें ऐसी भी है जिनका उपयोग विशेष समुदायों द्वारा परंपरागत रूप से भोजन के रूप में किया जाता रहा है एसी फसलों को ‘‘इथनों खाद्य फसलें (नृ-खाद्य फसलें) कहा जाता है ये फसलें केवल भोजन का साधन नहीं है बल्कि संस्कृति, परंपरा, स्वास्थ्य और सतत् जीवन शैली का आधार भी है। Ethno Food Crops दो शब्दों से मिलकर बना है। Ethno - किसी विशेष समुदाय से संबंधित है और Food Crops अर्थात भोजन के रूप में प्रयुक्त फसलें है। इस प्रकार इथनो खाद्य फसलें वे फसलें है जो किसी विशेष समुदाय द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी उगाई और उपभोग की जाती है।                       

    म.प्र. जिसे भारत का हृदय प्रदेश कहा जाता है, यहा जनजातीय और ग्रामीण संस्कृतियों में पारंपरिक खाद्य फसलों का विशेष योगदान है। यह शोध पत्र म.प्र. में प्रचलित इथनों खाद्य फसलों, उनके पोषणात्मक महत्व, सांस्कृतिक उपयोग, कृषि पद्धतियों तथा वर्तमान समय में उनके संरक्षण की आवश्यकता पर आधारित है आधुनिकीकरण एवं नकदी फसलों के कारण अनेक पारंपरिक फसलें लुप्त होने की कगार पर है। इस पेपर का उद्धेश्य इन फसलों के महत्व को रेखांकित करना एवं खाद्य सुरक्षा के संदर्भ में उनकी भूमिका को समझाना है।

शब्द कुंजी-पारंपरिक खाद्य फसलें, जनजातीय समाज, पोषण, सतत कृषि।