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January to March 2026 Article ID: NSS9615 Impact Factor:8.05 Cite Score:327 Download: 24 DOI: https://doi.org/ View PDf
स्वामी विवेकानन्द का शिक्षा-दर्शन: मूल्य आधारित शिक्षा की प्रासंगिकता
चन्द्रशेखर उसरेठे
सहायक प्राध्यापक (राजनीति विज्ञान)शासकीय महाविद्यालय, चैरई, जिला-छिन्दवाड़ा (म.प्र.)
शोध सारांश- स्वामी विवेकानन्द भारतीय नवजागरण के प्रमुख चिंतक, समाज-सुधारक तथा
आध्यात्मिक मार्गदर्शक रहे हैं। उन्होंने शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान या उपाधि
प्राप्ति का साधन नहीं माना,
बल्कि उसे
मनुष्य के सर्वांगीण विकास का आधार बताया। विवेकानन्द के अनुसार शिक्षा का
उद्देश्य चरित्र निर्माण,
आत्मविश्वास
का विकास,
व्यक्तित्व
निखार तथा समाजोपयोगी नागरिक तैयार करना होना चाहिए। उन्होंने ऐसी शिक्षा पर बल
दिया जो ज्ञान के साथ-साथ नैतिकता, अनुशासन, सेवा-भावना और
आत्मनिर्भरता को भी विकसित करे। वर्तमान समय में जब शिक्षा व्यवस्था में
मूल्य-ह्रास,
दिशाहीनता
तथा केवल रोजगार केन्द्रित सोच बढ़ती जा रही है, तब विवेकानन्द का शिक्षा-दर्शन
अत्यधिक प्रासंगिक हो जाता है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य स्वामी विवेकानन्द
के शिक्षा संबंधी विचारों का विश्लेषण करना तथा यह स्पष्ट करना है कि उनके
शिक्षा-दर्शन के माध्यम से आधुनिक शिक्षा को अधिक मानवतावादी, नैतिक और जीवनोपयोगी
कैसे बनाया जा सकता है।
