• January to March 2026 Article ID: NSS9632 Impact Factor:8.05 Cite Score:65 Download: 8 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9632 View PDf

    पर्यावरण क्षरण के कारण कामकाजी महिलाओं के मानसिक एवं सामाजिक स्वास्थ्य पर प्रभाव- एक समाज शास्त्रीय अध्ययन

      यामिनी टंडन
        शोधार्थी, समाजशास्त्र एवं समाजकार्य अध्ययन शाला पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर (छ.ग.)
      डॉ. टी.एस. सोनवानी
        सहा. प्राध्यापक, प्राचार्य शासकीय गोहरापदर, जिला गरियाबंद (छ.ग.)
      डॉ. एल.एस. गजपाल
        प्राध्यापक, समाजशास्त्र एवं समाजकार्य अध्ययन शाला पं रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर (छ.ग.)

शोध सारांश - प्रस्तुत शोध अध्ययन का उद्देश्य कामकाजी महिलाओं के बीच पर्यावरण के  क्षरण  के कारण उनके मानसिक, शारीरिक एवं सामाजिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव का पता लगाना है। पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव मानव जनित एवं प्राकृतिक कारणो से पड़ता है। वर्तमान में दुनिया तेजी से विकास के उच्चतम शिखर तक पहुंच रही है, इसका मुख्य कारण महिलाओं एवं पुरुषों का समतुल्य कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करना है। आधुनिकरण और भाग दौड़ की जिंदगी मे जी रही कामकाजी महिलाएं जहां एक और परिवार कार्य संघर्ष कारण तनाव, अवसाद में बीमारी से ग्रसित हो रही है, उसी प्रकार विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के कारण उनके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव रहा है।  इसके कारण उनमें तनाव, चिंता, सामाजिक अलगाव संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो रही है। इसका मुख्य कारण दुनिया औद्योगीकरण एवं नगरीकरण की तरफ बढ़ाना, उच्चतम सुख में जीवन शैली की चाह ,कम समय में अधिकतम आर्थिक लाभ लेने की चाह, नैतिक मूल्य तथा पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में ध्यान ना देना आदि शामिल है।

प्रस्तुत शोध अध्ययन हेतु छत्तीसगढ़ के विभिन्न विश्वविद्यालय में कार्यरत 50 तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के महिला कर्मचारियों का चयन देव निर्देशन विधि का प्रयोग करते हुए साक्षात्कार अनुसूची के माध्यम से किया गया है, शोध का स्वरूप वर्णनात्मक एवं आलोकनात्मक प्रणाली है।

प्रस्तुत अध्ययन से ज्ञात होता है, कि प्रकृति में प्राकृतिक वातावरण के क्षरण के कारण कामकाजी महिलाओं के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है तथा उनमें सामाजिक अलगाव की भावना भी उत्पन्न होती है।